pity on cumskins and other races except Indians and pakis none of you will ever experience this. ts is pure bliss legit pure crystal meth

SharpOrange

SharpOrange

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top dawg i have listened to all of you west music rock jazz rap r&b pink floyed to rufus du sol.

but this is just bliss.

@Chadeep @unstable @banku don @iblameocclusalcant
 
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who is this fat paki:feelswhat:
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top dawg i have listened to all of you west music rock jazz rap r&b pink floyed to rufus du sol.

but this is just bliss.

@Chadeep @unstable @banku don @iblameocclusalcant

Loosarada moo maské :oops:
 
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रात है महताब है साक़ी,
सारा मौसम शराब है साक़ी,
कुछ लम्हे ऐसे होते हैं,
जिनमें पीना सवाब है साक़ी।

बोतल खुली है, रक्स में जाम-ए-शराब है,
वो तो ख़ालिक है, बंदा-परवर है,
सारी दुनिया का रब-ए-अकबर है,
मेरा सरमाया-ए-हयात न पूछ,
एक साक़ी है, एक सागर है।

चश्म-ए-साक़ी से तलब करके गुलाबी दौर,
दिल के ज़ख्मों को कहीं बैठ के सी लेता हूँ,
सागर-ए-मय तो बड़ी चीज़ है, इक नेमत है,
अश्क भी आँख में भर आएँ तो पी लेता हूँ।

बोतल खुली है, रक्स में जाम-ए-शराब है,
ऐ मयकशों, तुम्हारी दुआ कामयाब है।

ऐसे हसीन वक़्त में पीना सवाब है,
साक़ी है, चाँदनी है, चमन है, शबाब है।

तस्कीन के सामान तो मिल जाते हैं,
कुछ साहिब-ए-ईमान तो मिल जाते हैं,
साक़ी ये दुआ है तेरा इक़बाल बुलंद,
मैकदे में इंसान तो मिल जाते हैं।

होंठों से लगाता हूँ तो मुस्काती है,
तस्कीन हर अंदाज़ से पहुँचाती है,
मय इसलिए है मुझको हसीनों से अज़ीज़,
आसानी से शीशे में उतर जाती है।

चराग़ दिल का जलाओ, बहुत उदास है रात,
खुशी का जश्न मनाओ, बहुत उदास है रात,
ग़मों का असर न पड़ जाए मयकशी पे मेरी,
पिलाओ और पिलाओ, बहुत उदास है रात।

मेरी नज़र को जुनूँ का पैग़ाम दे साक़ी,
मेरी हयात को लाफ़ानी शाम दे साक़ी,
ये रोज़-रोज़ का पीना मुझे पसंद नहीं,
कभी न होश में आऊँ वो जाम दे साक़ी।

इक ज़रा होश में आ लूँ तो कोई बात करूँ,
दिल की धड़कन को संभालूँ तो कोई बात करूँ,
साक़िया बात भी करने की अभी ताब नहीं,
जाम होंठों से लगा लूँ तो कोई बात करूँ।

लहराकर, झूम-झूम के ला, मुस्कुरा के ला,
फूलों के रस में चाँद की किरणें मिला के ला,
कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं,
जा मैकदे से मेरी जवानी उठा के ला।

हर ग़म को दिलआवेज़ किया देता हूँ,
एहसास की लौ तेज़ किया देता हूँ,
तू ज़ुल्फ़ को कुछ और परेशान कर दे,
मैं जाम को लबरेज़ किया देता हूँ।

क्यों मैकदे में शेख जी बनते हो पारसाज़,
नज़रें बता रही हैं कि नीयत खराब है।

जिससे किया था प्यार उसी ने दिए हैं ग़म,
सच पूछिए तो दिल का लगाना अज़ाब है।

पहलू में है रक़ीब तुम्हारे, खुदा की शान,
काँटा भी है वहीं पे जहाँ पे गुलाब है।

कहते हैं जाम भर के वो कैसी अदा के साथ,
पी लो हमारे हाथ से, पीना सवाब है।

सागर है, मय है, दौर है,
अग़र बहार है — पी लो।

ऐ ज़ाहिद, आ शराब पी ले, न कर तू कुछ इज्तिनाब, पी ले,
मैं तेरी मानूँ नमाज़ पढ़ लूँ, तू मेरी मान शराब पी ले।

मैंने माना जनाब पीता हूँ,
बख़ुदा बेहिसाब पीता हूँ,
लोग लोगों का ख़ून पीते हैं,
मैं तो फिर भी शराब पीता हूँ।
ज़िंदगी का अज़ाब पीता हूँ,
बन के खाना-खराब पीता हूँ,
रोज़-ए-महशर हिसाब हो न सके,
इसलिए बेहिसाब पीता हूँ।

ले के सागर में आफ़ताब पिएँ,
ये समझ कर के सवाब पिएँ,
कुफ़्र है नेमतों का ठुकराना,
शेख जी आओ शराब पिएँ।

ज़ाहिद, मुझे जन्नत का तलबगार न कर,
जो बस में तेरे नहीं वो इकरार न कर,
दो रिंदों में मस्ती नहीं तेरा मस्लक,
साक़ी के तबर्रुक से तो इंकार न कर।

चाक-ए-दिल-ए-सद-पारा को सी लो, सी लो,
कुछ देर तो बेख़ुदी में जी लो, जी लो,
क्यों हज़रत-ए-ज़ाहिद है तअम्मुल इतना,
अरे मैखाने की खैरात है, पी लो, पी लो।

जिस तरह आएगी बख़्शिश,
जोश आएगा कैसे खुदा को,
उसकी रहमत पे करके भरोसा,
कुफ़्र है इस गुनाह का ना करना।

रूह-ए-दर्द-ए-हिज्र, चेहरे पे तहरीर है फ़ना,
पढ़ लीजिए खुली हुई दिल की किताब है।

@browncurrycel
 
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top dawg i have listened to all of you west music rock jazz rap r&b pink floyed to rufus du sol.

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@Chadeep @unstable @banku don @iblameocclusalcant

You don't need whiskey or beer on a sad day......this is enough :aheago::aheago:
 
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रात है महताब है साक़ी,
सारा मौसम शराब है साक़ी,
कुछ लम्हे ऐसे होते हैं,
जिनमें पीना सवाब है साक़ी।

बोतल खुली है, रक्स में जाम-ए-शराब है,
वो तो ख़ालिक है, बंदा-परवर है,
सारी दुनिया का रब-ए-अकबर है,
मेरा सरमाया-ए-हयात न पूछ,
एक साक़ी है, एक सागर है।

चश्म-ए-साक़ी से तलब करके गुलाबी दौर,
दिल के ज़ख्मों को कहीं बैठ के सी लेता हूँ,
सागर-ए-मय तो बड़ी चीज़ है, इक नेमत है,
अश्क भी आँख में भर आएँ तो पी लेता हूँ।

बोतल खुली है, रक्स में जाम-ए-शराब है,
ऐ मयकशों, तुम्हारी दुआ कामयाब है।

ऐसे हसीन वक़्त में पीना सवाब है,
साक़ी है, चाँदनी है, चमन है, शबाब है।

तस्कीन के सामान तो मिल जाते हैं,
कुछ साहिब-ए-ईमान तो मिल जाते हैं,
साक़ी ये दुआ है तेरा इक़बाल बुलंद,
मैकदे में इंसान तो मिल जाते हैं।

होंठों से लगाता हूँ तो मुस्काती है,
तस्कीन हर अंदाज़ से पहुँचाती है,
मय इसलिए है मुझको हसीनों से अज़ीज़,
आसानी से शीशे में उतर जाती है।

चराग़ दिल का जलाओ, बहुत उदास है रात,
खुशी का जश्न मनाओ, बहुत उदास है रात,
ग़मों का असर न पड़ जाए मयकशी पे मेरी,
पिलाओ और पिलाओ, बहुत उदास है रात।

मेरी नज़र को जुनूँ का पैग़ाम दे साक़ी,
मेरी हयात को लाफ़ानी शाम दे साक़ी,
ये रोज़-रोज़ का पीना मुझे पसंद नहीं,
कभी न होश में आऊँ वो जाम दे साक़ी।

इक ज़रा होश में आ लूँ तो कोई बात करूँ,
दिल की धड़कन को संभालूँ तो कोई बात करूँ,
साक़िया बात भी करने की अभी ताब नहीं,
जाम होंठों से लगा लूँ तो कोई बात करूँ।

लहराकर, झूम-झूम के ला, मुस्कुरा के ला,
फूलों के रस में चाँद की किरणें मिला के ला,
कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं,
जा मैकदे से मेरी जवानी उठा के ला।

हर ग़म को दिलआवेज़ किया देता हूँ,
एहसास की लौ तेज़ किया देता हूँ,
तू ज़ुल्फ़ को कुछ और परेशान कर दे,
मैं जाम को लबरेज़ किया देता हूँ।

क्यों मैकदे में शेख जी बनते हो पारसाज़,
नज़रें बता रही हैं कि नीयत खराब है।

जिससे किया था प्यार उसी ने दिए हैं ग़म,
सच पूछिए तो दिल का लगाना अज़ाब है।

पहलू में है रक़ीब तुम्हारे, खुदा की शान,
काँटा भी है वहीं पे जहाँ पे गुलाब है।

कहते हैं जाम भर के वो कैसी अदा के साथ,
पी लो हमारे हाथ से, पीना सवाब है।

सागर है, मय है, दौर है,
अग़र बहार है — पी लो।

ऐ ज़ाहिद, आ शराब पी ले, न कर तू कुछ इज्तिनाब, पी ले,
मैं तेरी मानूँ नमाज़ पढ़ लूँ, तू मेरी मान शराब पी ले।

मैंने माना जनाब पीता हूँ,
बख़ुदा बेहिसाब पीता हूँ,
लोग लोगों का ख़ून पीते हैं,
मैं तो फिर भी शराब पीता हूँ।
ज़िंदगी का अज़ाब पीता हूँ,
बन के खाना-खराब पीता हूँ,
रोज़-ए-महशर हिसाब हो न सके,
इसलिए बेहिसाब पीता हूँ।

ले के सागर में आफ़ताब पिएँ,
ये समझ कर के सवाब पिएँ,
कुफ़्र है नेमतों का ठुकराना,
शेख जी आओ शराब पिएँ।

ज़ाहिद, मुझे जन्नत का तलबगार न कर,
जो बस में तेरे नहीं वो इकरार न कर,
दो रिंदों में मस्ती नहीं तेरा मस्लक,
साक़ी के तबर्रुक से तो इंकार न कर।

चाक-ए-दिल-ए-सद-पारा को सी लो, सी लो,
कुछ देर तो बेख़ुदी में जी लो, जी लो,
क्यों हज़रत-ए-ज़ाहिद है तअम्मुल इतना,
अरे मैखाने की खैरात है, पी लो, पी लो।

जिस तरह आएगी बख़्शिश,
जोश आएगा कैसे खुदा को,
उसकी रहमत पे करके भरोसा,
कुफ़्र है इस गुनाह का ना करना।

रूह-ए-दर्द-ए-हिज्र, चेहरे पे तहरीर है फ़ना,
पढ़ लीजिए खुली हुई दिल की किताब है।

@browncurrycel

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रात है महताब है साक़ी,
सारा मौसम शराब है साक़ी,
कुछ लम्हे ऐसे होते हैं,
जिनमें पीना सवाब है साक़ी।

बोतल खुली है, रक्स में जाम-ए-शराब है,
वो तो ख़ालिक है, बंदा-परवर है,
सारी दुनिया का रब-ए-अकबर है,
मेरा सरमाया-ए-हयात न पूछ,
एक साक़ी है, एक सागर है।

चश्म-ए-साक़ी से तलब करके गुलाबी दौर,
दिल के ज़ख्मों को कहीं बैठ के सी लेता हूँ,
सागर-ए-मय तो बड़ी चीज़ है, इक नेमत है,
अश्क भी आँख में भर आएँ तो पी लेता हूँ।

बोतल खुली है, रक्स में जाम-ए-शराब है,
ऐ मयकशों, तुम्हारी दुआ कामयाब है।

ऐसे हसीन वक़्त में पीना सवाब है,
साक़ी है, चाँदनी है, चमन है, शबाब है।

तस्कीन के सामान तो मिल जाते हैं,
कुछ साहिब-ए-ईमान तो मिल जाते हैं,
साक़ी ये दुआ है तेरा इक़बाल बुलंद,
मैकदे में इंसान तो मिल जाते हैं।

होंठों से लगाता हूँ तो मुस्काती है,
तस्कीन हर अंदाज़ से पहुँचाती है,
मय इसलिए है मुझको हसीनों से अज़ीज़,
आसानी से शीशे में उतर जाती है।

चराग़ दिल का जलाओ, बहुत उदास है रात,
खुशी का जश्न मनाओ, बहुत उदास है रात,
ग़मों का असर न पड़ जाए मयकशी पे मेरी,
पिलाओ और पिलाओ, बहुत उदास है रात।

मेरी नज़र को जुनूँ का पैग़ाम दे साक़ी,
मेरी हयात को लाफ़ानी शाम दे साक़ी,
ये रोज़-रोज़ का पीना मुझे पसंद नहीं,
कभी न होश में आऊँ वो जाम दे साक़ी।

इक ज़रा होश में आ लूँ तो कोई बात करूँ,
दिल की धड़कन को संभालूँ तो कोई बात करूँ,
साक़िया बात भी करने की अभी ताब नहीं,
जाम होंठों से लगा लूँ तो कोई बात करूँ।

लहराकर, झूम-झूम के ला, मुस्कुरा के ला,
फूलों के रस में चाँद की किरणें मिला के ला,
कहते हैं उम्र-ए-रफ़्ता कभी लौटती नहीं,
जा मैकदे से मेरी जवानी उठा के ला।

हर ग़म को दिलआवेज़ किया देता हूँ,
एहसास की लौ तेज़ किया देता हूँ,
तू ज़ुल्फ़ को कुछ और परेशान कर दे,
मैं जाम को लबरेज़ किया देता हूँ।

क्यों मैकदे में शेख जी बनते हो पारसाज़,
नज़रें बता रही हैं कि नीयत खराब है।

जिससे किया था प्यार उसी ने दिए हैं ग़म,
सच पूछिए तो दिल का लगाना अज़ाब है।

पहलू में है रक़ीब तुम्हारे, खुदा की शान,
काँटा भी है वहीं पे जहाँ पे गुलाब है।

कहते हैं जाम भर के वो कैसी अदा के साथ,
पी लो हमारे हाथ से, पीना सवाब है।

सागर है, मय है, दौर है,
अग़र बहार है — पी लो।

ऐ ज़ाहिद, आ शराब पी ले, न कर तू कुछ इज्तिनाब, पी ले,
मैं तेरी मानूँ नमाज़ पढ़ लूँ, तू मेरी मान शराब पी ले।

मैंने माना जनाब पीता हूँ,
बख़ुदा बेहिसाब पीता हूँ,
लोग लोगों का ख़ून पीते हैं,
मैं तो फिर भी शराब पीता हूँ।
ज़िंदगी का अज़ाब पीता हूँ,
बन के खाना-खराब पीता हूँ,
रोज़-ए-महशर हिसाब हो न सके,
इसलिए बेहिसाब पीता हूँ।

ले के सागर में आफ़ताब पिएँ,
ये समझ कर के सवाब पिएँ,
कुफ़्र है नेमतों का ठुकराना,
शेख जी आओ शराब पिएँ।

ज़ाहिद, मुझे जन्नत का तलबगार न कर,
जो बस में तेरे नहीं वो इकरार न कर,
दो रिंदों में मस्ती नहीं तेरा मस्लक,
साक़ी के तबर्रुक से तो इंकार न कर।

चाक-ए-दिल-ए-सद-पारा को सी लो, सी लो,
कुछ देर तो बेख़ुदी में जी लो, जी लो,
क्यों हज़रत-ए-ज़ाहिद है तअम्मुल इतना,
अरे मैखाने की खैरात है, पी लो, पी लो।

जिस तरह आएगी बख़्शिश,
जोश आएगा कैसे खुदा को,
उसकी रहमत पे करके भरोसा,
कुफ़्र है इस गुनाह का ना करना।

रूह-ए-दर्द-ए-हिज्र, चेहरे पे तहरीर है फ़ना,
पढ़ लीजिए खुली हुई दिल की किताब है।
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